नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार के लिए यह सप्ताह किसी बड़े वित्तीय झटके से कम नहीं रहा. लगातार जारी मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) और अमेरिकी डॉलर में आई रिकॉर्ड मजबूती के चलते सोने की कीमतों में इस सप्ताह 5.89 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई. ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा की गई बिकवाली ने कीमती धातुओं की चमक को फीका कर दिया है.
बाजार के ताज़ा आंकड़े: MCX और हाजिर भाव
शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बाजार में मिला-जुला रुख रहा. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड अप्रैल वायदा में मामूली 0.23 प्रतिशत की बढ़त देखी गई और यह ₹1,44,825 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. इसके विपरीत, MCX सिल्वर मई वायदा में 1.72 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई और यह ₹2,27,470 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया.
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,56,436 थी, जो शुक्रवार तक गिरकर ₹1,47,218 पर आ गई. यानी महज पांच दिनों में हाजिर बाजार में सोना करीब ₹9,218 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है.
गिरावट के पीछे के 3 बड़े कारण
- डॉलर का दबदबा: अमेरिकी डॉलर के इंडेक्स में आई मजबूती ने वैश्विक बाजार में सोने को महंगा कर दिया है, जिससे मांग में कमी आई.
- केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) और बैंक ऑफ इंग्लैंड समेत कई केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों को ऊंचा रखने के संकेत दिए हैं. जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश की अपील कम हो जाती है.
- भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट: इजरायल और ईरान के बीच ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों से कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं. इससे ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ (आयातित महंगाई) का खतरा बढ़ा है, जिससे बाजार में अस्थिरता है.
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए अब ₹1,35,000 से ₹1,40,000 का स्तर एक मजबूत खरीदारी क्षेत्र साबित हो सकता है. वहीं, ऊपर की तरफ ₹1,50,000 से ₹1,52,000 के स्तर पर भारी रेजिस्टेंस (रुकावट) देखने को मिल सकती है. यदि आप खरीदारी का मन बना रहे हैं, तो विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट एक अच्छा अवसर हो सकती है, क्योंकि चांदी में अभी भी ₹2,40,000 तक जाने का दम बाकी है.
