उत्तर प्रदेश से भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने शुक्रवार को राज्यसभा में रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम (रेरा) और दिवाला कानूनों में व्यापक संशोधन की मांग करते हुए कहा कि देशभर में हजारों घर खरीदारों ने अपनी जीवन भर की बचत खर्च कर दी, लेकिन अब तक उन्हें फ्लैट नहीं मिले, जबकि बिल्डर दिवालिया घोषित होकर जवाबदेही से बच निकलते हैं।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए बाजपेयी ने कहा कि केंद्र सरकार ने रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम (रेरा) लागू किया और ‘इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया’ तथा राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण जैसे संस्थान स्थापित किए, लेकिन विशेषकर उत्तर प्रदेश में इसका क्रियान्वयन अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में रेरा का क्रियान्वयन पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है। हजारों परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं और कई बिल्डर खुद को दिवालिया घोषित कर कानूनी जवाबदेही से बच गए हैं।”

