निजी स्कूलों में हर साल शुल्क वृद्धि पर रोक के लिए पारदर्शी नियामक बनाने की राज्यसभा में उठी मांग
राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस सांसद रजनी अशोकराव पाटिल ने निजी स्कूलों की बढ़ती फीस पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और उन्होंने सरकार से फीस वृद्धि पर सख्त रुख अपनाते हुए एक पारदर्शी नियामक बनाने की मांग की. राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए पाटिल ने कहा कि देशभर के निजी स्कूलों में अनियंत्रित और लगातार बढ़ती फीस संरचना मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों पर असहनीय दबाव डाल रही है.
उन्होंने कहा, “शिक्षा कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार है। लेकिन आज कई अभिभावकों के लिए तथाकथित अच्छे स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना आर्थिक बोझ बन गया है, जो कई बार संकट की स्थिति तक पहुंच जाता है.”
पाटिल ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते हैं, अक्सर बिना पारदर्शिता या उचित कारण के. उन्होंने कहा कि ट्यूशन फीस के अलावा अभिभावकों से विकास शुल्क, गतिविधि शुल्क, स्मार्ट क्लास शुल्क जैसे कई अतिरिक्त शुल्क लिए जाते हैं और उन्हें महंगी दरों पर स्कूल से, निर्धारित विक्रेताओं से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है.
उन्होंने कहा, “यह शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण को दर्शाता है, जो हमारे संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.”
पाटिल ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए आरक्षित हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में समावेशिता की भावना कमजोर हो रही है और शेष 75 प्रतिशत अभिभावकों पर अनियंत्रित आर्थिक बोझ डाला जा रहा है.
उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने फीस नियमन के लिए कानून बनाए हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन कमजोर और असंगत है.
कांग्रेस सांसद ने स्कूल फीस पर एक मजबूत, पारदर्शी और समान नियामक ढांचा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
उन्होंने सरकार से फीस वृद्धि पर सख्त नियंत्रण, स्कूलों की वित्तीय व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता, छिपे और अनिवार्य शुल्कों पर रोक लगाने तथा अभिभावकों और छात्रों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की.
उन्होंने कहा, “यदि अभी कार्रवाई नहीं की गई, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार बन जाएगी, न कि हर बच्चे का अधिकार। शिक्षा सशक्त बनाने का माध्यम होनी चाहिए, परिवारों को आर्थिक रूप से कमजोर करने का नहीं.”
पश्चिम एशिया के संकट का समाधान कूटनीति से ही संभव, सरकार निपटने के लिए पूरी तरह तैयार: मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए अप्रत्याशित संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है जिससे निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तत्पर है और देशवासियों को उसी तरह तैयार रहना होगा जिस तरह एकजुटता के साथ सबने कोरोना वायरस महामारी का सामना किया था.
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर लोकसभा में वक्तव्य देते हुए कहा कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है तथा भारत तनाव को कम करने व संघर्ष समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है.
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि पिछले एक दशक में ऊर्जा क्षेत्र में सरकार की तैयारियों के कारण आज हालात से निपटने में मदद मिल रही है. प्रधानमंत्री ने सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘सरकार संवेदनशील है, सतर्क है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है.’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस युद्ध के कारण दुनिया में बने हालात का प्रभाव लंबे समय तक रहने की आशंका है। इसलिए हमें तैयार रहना होगा, हमें एकजुट रहना होगा. हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं. अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है. धीरज, संयम और शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है. यही हमारी पहचान है.’’
मोदी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल, गैस और उर्वरक से लदे जहाजों के आवागमन में चुनौती के बावजूद सरकार का प्रयास देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बहुत अधिक प्रभावित नहीं होने देने का है.
उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है और पेट्रोल-डीजल की लगातार सुचारू आपूर्ति पर काम किया गया है.
प्रधानमंत्री ने कृषि संबंधी चुनौतियों के संदर्भ में कहा कि सरकार किसानों की हरसंभव मदद करती रहेगी.
उन्होंने कहा कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के हालात से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था, लोगों के जीवन पर बहुत विपरीत असर हो रहा है.
मोदी ने कहा कि भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं जो आर्थिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय सुरक्षा से जुड़ी हैं.
उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ भारत के व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है और देश में कच्चे तेल तथा गैस के बड़े हिस्से की आपूर्ति करता है.
मोदी ने कहा कि यह क्षेत्र इसलिए भी अहम है क्योंकि खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं.
उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र के समुद्र में संचालित व्यावसायिक जहाजों में तैनात चालक दल के सदस्यों में भारतीयों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए भारत की चिंताए स्वाभाविक रूप से अधिक हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज में संदेश दुनिया में जाए.’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की स्थिति बनने के बाद उन्होंने स्वयं पश्चिम एशिया के अधिकतर राष्ट्राध्यक्षों से दो बार फोन पर बात की है और उन सभी ने वहां भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से इस दौरान कुछ लोगों की मृत्यु हो गई और कुछ लोग घायल हो गए.
मोदी ने कहा कि प्रभावित देशों में भारत के जितने भी मिशन हैं वे निरंतर भारतीयों की मदद में जुटे हैं, वहां काम करने वाले भारतीयों, पर्यटकों को हर संभव मदद दी जा रही है.
उन्होंने कहा कि ऐसे संकट के समय देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा भारत की बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है.
मोदी ने कहा, ‘‘युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं. ईरान से ही अभी तक लगभग एक हजार भारतीय सुरक्षित वापस आए हैं। इनमें मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 700 से अधिक युवा हैं.’’
उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में भारतीय बच्चों की निर्बाध पढ़ाई के लिए सीबीएसई उचित कदम उठा रही है.
उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में भारत ने संकट के ऐसे समय से निपटने के लिए कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है और आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है, वहीं 65 लाख टन से अधिक भंडारण पर काम किया जा रहा है.
मोदी ने कहा, ‘‘सरकार का प्रयास यह है कि जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की आपूर्ति होती रहे. भारत सरकार खाड़ी और आसपास के जहाज परिवहन मार्गों पर निरंतर नजर बनाए हुए है. तेल, गैस और उर्वरक से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं. हम अपने सभी वैश्विक सहयोगियों के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं ताकि हमारे समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें.’’
उन्होंने कहा कि ऐसे ही प्रयासों के कारण बीते दिनों होर्मुज में फंसे देश के कई जहाज भारत आए हैं. मोदी ने कहा कि संकट के समय इथेनॉल उत्पादन तथा ब्लेंडिंग के क्षेत्र में पिछले 10-11 साल में देश में की गई तैयारी भी बहुत काम आ रही है.
मोदी ने कहा कि आज रेलवे का इतने बड़े स्तर पर विद्युतीकरण नहीं होता तो हर साल 180 करोड़ लीटर डीजल अतिरिक्त लगता. उन्होंने कहा कि देश में मेट्रो का 1100 किलोमीटर नेटवर्क, राज्यों को केंद्र द्वारा 15,000 इलेक्ट्रिक बसें दिए जाने समेत वैकल्पिक ईंधन पर हो रहे कार्यों से भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान पश्चिम एशिया संकट से दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हैं और भारत पर इसका कम से कम प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था के आधारभूत क्षेत्र मजबूत हैं और इससे भी इस संकट के समय में मदद मिली है.
मोदी ने कहा कि एक अंतर-मंत्रालयीन समूह इस संकट पर प्रतिदिन बैठक करता है और आयात-निर्यात में आने वाली दिक्कतों पर बात कर समाधान के लिए काम रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि सरकार और उद्योगों के साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे.’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे संकटों से देश के किसानों को बचाने के लिए सरकार ने पिछले एक दशक में कई कदम उठाए हैं जिनमें खाद की पर्याप्त उपलब्धता, यूरिया संयंत्र स्थापित किया जाना, डीएपी तथा एनपीके जैसी खादों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना आदि शामिल हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘आज देश में किसानों ने अन्न भंडार भर रखे हैं. हमारे पास पर्याप्त खाद्यान्न हैं. प्रयास है कि खरीफ मौसम की सही से बुवाई हो. ’’
मोदी ने कोरोना वायरस महामारी के समय का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने अतीत में भी दुनिया के संकटों का किसानों पर बोझ नहीं पड़ने दिया.
उन्होंने कहा, ‘‘मैं देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार उनकी हरसंभव मदद करती रहेगी.’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में आने वाले गर्मी के मौसम को देखते हुए बिजली की मांग बढ़ने की चुनौती रहेगी, लेकिन देश में फिलहाल सभी बिजली यंयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार पर्याप्त हैं.
उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार के कदमों ने भी उसकी तैयारियों में मदद की है.
मोदी ने कहा, ‘‘नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में बीते एक दशक में बड़े कदम उठाए गए हैं. हमारी कुल अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है. बीते 11 वर्ष में सौर ऊर्जा उत्पादन करीब तीन गीगावाट से 140 गीगावाट तक पहुंचा गया है.’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने भविष्य की तैयारी बढ़ाते हुए परमाणु ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है.
उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक कूटनीति की बात है, भारत की भूमिका स्पष्ट है। शुरुआत से हमने इस संघर्ष को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यत की है. मैंने स्वयं पश्चिम एशिया के संबंधित नेताओं से बात की है. उनसे तनाव कम करने और संघर्ष खत्म करने का आग्रह किया है.’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने इस संघर्ष के समय नागरिकों और परिवहन मार्गों से जुड़े हमलों का विरोध किया है.
उन्होंने कहा, ‘‘होर्मुज में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमला अस्वीकार्य है. भारत इस हालात में युद्ध के माहौल में कूटनीति के जरिए भारतीय जहाजों के निरंतर आवागमन के लिए प्रयासरत है. भारत मानवता के हित में और शांति के पक्ष में हमेशा आवाज उठाता रहा है. मैं फिर कहूंगा कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है.’’
मोदी ने कहा, ‘‘इस युद्ध में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है. इसलिए भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधानों के लिए प्रोत्साहित करने का है.’’
उन्होंने कहा कि कुछ तत्व ऐसे संकट में गलत फायदा उठाने का प्रयास करते हैं, इसलिए कानून व्यवस्था से जुड़ी सभी एजेंसियों को सतर्क रखा गया है.
मोदी ने कहा कि तटीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है.
मोदी ने कहा, ‘‘देश की सभी राज्य सरकारें और नागरिक जब मिलकर चलेंगे तो हम हर चुनौती को चुनौती दे सकते हैं.’’
