नई दिल्ली: रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सोमवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे, जिसमें वे देश की आगामी जनगणना प्रक्रिया के लिए रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे.
नई दिल्ली में नेशनल मीडिया सेंटर में हुई ब्रीफिंग के दौरान कमिश्नर से यह उम्मीद की जा रही है कि वे एक विस्तृत रूपरेखा पेश करेंगे जिसमें यह बताया जाएगा कि पूरे भारत में जनगणना की प्रक्रिया कैसे पूरी की जाएगी. इस प्रक्रिया से पहले भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने जनगणना में शामिल अधिकारियों को इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की गलत हरकत के प्रति कड़ी चेतावनी जारी की है.
लापरवाही या डेटा का गलत इस्तेमाल, जनगणना के काम में रुकावट डालना और नागरिकों से जान-बूझकर अपमानजनक या अनुचित सवाल पूछना जैसे कामों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि इस तरह के उल्लंघन जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत दंडनीय हैं और इसके लिए जुर्माना और तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है. 17 मार्च को सभी राज्यों को भेजे गए एक संदेश में नारायण ने जनगणना अधिनियम की धारा 11 के तहत दंडात्मक प्रावधानों के बारे में बताया.
ये सजाएं अपराध की गंभीरता के आधार पर 1,000 रुपये के जुर्माने से लेकर तीन साल तक की जेल या दोनों हो सकती हैं. आने वाली जनगणना की एक अहम खासियत इस पूरी प्रक्रिया का पूरी तरह से डिजिटलीकरण होना है. पहली बार यह पूरी कवायद ऑनलाइन होगी. इससे नागरिक एक तय समय-सीमा के भीतर ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (खुद जानकारी भरने) सिस्टम के जरिए अपनी जानकारी जमा कर सकेंगे.
एक अहम बदलाव के तहत 2027 की जनगणना में एक ही घर में साथ रहने वाले ‘लिव-इन’ जोड़ों को भी शादीशुदा माना जाएगा, बशर्ते वे अपने रिश्ते को एक ‘स्थिर रिश्ता’ मानते हों. जनगणना के ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ पोर्टल पर अक्सर पूछे जाने वाले इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या ‘लिव-इन’ जोड़ों को शादीशुदा माना जाएगा.
सूत्रों ने बताया कि ‘अगर वे (जोड़ा) अपने रिश्ते को एक स्थिर रिश्ता मानते हैं, तो उन्हें वाकई शादीशुदा जोड़ा ही माना जाना चाहिए.’ यह स्पष्टीकरण पहली बार है जब भारत की जनगणना से जुड़ी प्रक्रियाओं के संदर्भ में इस तरह का कोई रुख औपचारिक तौर पर सामने आया है.’
ऑनलाइन सिस्टम अपनाने से लोग अपनी जनगणना की जानकारी सीधे खुद ही भर सकेंगे, जिससे जनगणना करने वालों पर निर्भरता कम होगी और डेटा इकट्ठा करने की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी. जनगणना के प्रश्नावली में ‘हाउसलिस्टिंग’ (घरों की सूची बनाने) वाले चरण में 33 सवाल शामिल होंगे, जिनमें से एक सवाल किसी घर में रहने वाले शादीशुदा जोड़ों की संख्या से जुड़ा होगा.
इस चरण का मकसद पूरे देश के घरों का एक पूरा डेटाबेस तैयार करना है और इसके 45 दिनों तक चलने की उम्मीद है. ‘हाउसलिस्टिंग’ चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरा किया जाना है, जिसमें हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए अलग-अलग समय-सीमा अधिकारियों द्वारा अलग से जारी की जाएगी.
