नई दिल्ली: शहीद दिवस के अवसर पर देश आज महान क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को नमन कर रहा है. इसी कड़ी में राष्ट्रीय राजधानी के पार्लियामेंट स्ट्रीट स्थित आर.सी.एस. कार्यालय परिसर में एक ऐतिहासिक अध्याय का पुनरुद्धार हुआ. यहां शहीद-ए-आजम भगत सिंह की एक भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया. इसके साथ ही, उसी परिसर में स्थित उस ऐतिहासिक कोर्ट ट्रायल रूम का भी जीर्णोद्धार कर लोकार्पण किया गया, जहां कभी अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई की थी.

क्रांतिकारी चेतना की नई प्रेरणा
अनावरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह प्रतिमा केवल पत्थर की मूरत नहीं, बल्कि उस क्रांतिकारी चेतना का संचार है जिसने युवाओं को गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का साहस दिया. यह स्थल अब आने वाली पीढ़ियों के लिए एक तीर्थ के समान होगा, जो उन्हें माँ भारती की सेवा में सर्वस्व अर्पित करने का संकल्प दिलाएगा.
दिल्ली के मंत्री रविंदर इंद्रजीत सिंह ने भी इस पहल के बारे में बात की और इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा, “यह वह गलियारा है जहां कभी ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा गूंजा था और जहां भगत सिंह पर मुकदमे चले थे. भगत सिंह की प्रतिमा एक श्रद्धांजलि के रूप में स्थापित की गई है, जो लोगों, विशेष रूप से युवाओं को उनके जीवन के बारे में जानने का एक अवसर प्रदान करती है.” भारत की आज़ादी के लिए दिए गए उनके इस सर्वोच्च बलिदान को हर साल 23 मार्च को ‘शहीद दिवस’ के रूप में याद किया जाता है. यह दिन लाहौर षड्यंत्र केस और 1928 में ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या का बदला लेने में उनकी भूमिका को समर्पित है.


