अगर आप सफर के दौरान किसी अजनबी की मदद के लिए अपना मोबाइल दे देते हैं, तो सतर्क हो जाइए। पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ट्रेन में यात्रियों का भरोसा जीतकर उनके सिम को चालाकी से “पोर्ट” करा लेता था और फिर उनके बैंक खातों से पैसे साफ कर देता था। ट्रेन यात्रियों को निशाना बनाकर सिम पोर्ट के जरिए ठगी करने वाले गिरोह के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मनी ट्रेल का पीछा करते हुए पुलिस ने नत्थूपुरा, बुराड़ी निवासी दो सगे भाइयों सचिन कुमार गुप्ता और नितिन कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन और कई एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम निकालने में किया जाता था।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन ने बताया कि यह मामला रोहिणी सेक्टर-6 की रहने वाली वंदना गुप्ता की शिकायत पर सामने आया। पीड़िता ने बताया था कि संदिग्ध तरीके से उनके मोबाइल नंबर का सिम पोर्ट हो गया और बाद में उनके खाते से पैसे निकल गए। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों और लेनदेन की कड़ी (मनी ट्रेल) खंगाली, जिससे आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
कॉल करने के लिए मांगा फोन
शिकायतकर्ता वंदना 21 जनवरी को अपने बेटे के साथ कानपुर से दिल्ली लौट रही थीं। सफर के दौरान ट्रेन में उनकी मुलाकात सचिन गुप्ता और खुद को उसकी भाभी बताने वाली एक महिला से हुई। बताया जाता है कि आरोपियों ने बातचीत के जरिए मां-बेटे का भरोसा जीत लिया और खुद को मददगार यात्री के रूप में पेश किया। कुछ देर बाद उन्होंने कॉल करने का बहाना बनाकर दोनों से मोबाइल फोन मांगे।
वंदना और उनके बेटे ने बिना शक किए अपना फोन दे दिया। आरोपियों ने थोड़ी देर मोबाइल अपने पास रखा और फिर वापस कर दिया, जिससे किसी को संदेह नहीं हुआ। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर सिम से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली या पोर्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिसके बाद आगे चलकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया। शिकायतकर्ता वंदना और उनके बेटे के साथ ठगी उस समय उजागर हुई, जब अगले ही दिन उनके मोबाइल नंबर अचानक डी-एक्टिवेट हो गए। इसके बाद 30 जनवरी को उनके क्रेडिट कार्ड से 20,550 रुपये, 2,627 रुपये और 25,687 रुपये के तीन अनाधिकृत ट्रांजैक्शन कर दिए गए।
ऐसे खुली साजिश की परतें
पूछताछ में मास्टरमाइंड सचिन कुमार गुप्ता ने अपनी पूरी मॉडस ऑपरेंडी (अपराध करने का तरीका) कबूल किया। बीएससी पास सचिन पहले Reliance Jio के एक स्टोर में काम कर चुका था, जिससे उसे सिम जारी करने और पोर्टिंग सिस्टम की तकनीकी खामियों की गहरी जानकारी हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, ट्रेन में मोबाइल मांगने के दौरान उसने चुपके से सिम पोर्ट करने की “पोर्टिंग रिक्वेस्ट” भेज दी और फोन पर आए UPC (यूनिक पोर्टिंग कोड) को नोट कर लिया। इसी कोड के जरिए बाद में नंबर को दूसरे सिम पर ट्रांसफर कर लिया गया।
जालसाजों ने बचने के लिए किया ये काम
पुलिस जांच में सामने आया कि जालसाज सचिन कुमार गुप्ता ने अपनी चालाकी से वारदात को छिपाने के लिए बेहद सोची-समझी रणनीति अपनाई। सचिन ने पहले अपने मोबाइल से पोर्टिंग मैसेज डिलीट कर दिए, ताकि कोई भी शिकार उसके ट्रांजैक्शन या सिम पोर्टिंग के संकेत को देख न सके। इसके बाद उसने उसी UPC कोड का इस्तेमाल कर अपने भाई के नाम पर नए सिम कार्ड जारी करवाए। जैसे ही नया सिम एक्टिव हुआ, उसे बैंकिंग और अन्य पेमेंट ऐप्स के नोटिफिकेशन मिलने लगे, जिससे उसने तुरंत ओटीपी और लेनदेन का नियंत्रण हासिल किया। जांच में पता चला कि वह नंबर CRED ऐप पर एक सक्रिय क्रेडिट कार्ड से रजिस्टर्ड था, जिससे उसने पैसे ट्रांसफर करना शुरू किया।
ऐप से पैसोंं का किया हेरफेर
उसने नया सिम अपने फोन में इंस्टॉल किया और रजिस्टर्ड सिम का इस्तेमाल करके OTP ऑथेंटिकेशन के जरिए ऐप में ऑटोमैटिक एक्सेस हासिल कर लिया। 30 जनवरी को उसने 2,627 रुपये की टेस्ट पेमेंट की, ताकि सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं, यह जांच सके। इसके बाद उसने अपने भाई के अकाउंट में 20,000 रुपये और अपनी पत्नी प्रिया गुप्ता के अकाउंट में 25,000 रुपये ट्रांसफर किए। बाद में उसके भाई ने ATM कार्ड का इस्तेमाल कर 20,000 रुपये निकाल लिए। पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले में तकनीकी ज्ञान और सावधानीपूर्वक योजना का इस्तेमाल किया गया। गिरोह की इस चालाकी के कारण पीड़ितों के खाते खाली कर दिए गए।
ऐसे आरोपियों तक पहुंची पुलिस
साइबर पुलिस की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला कि पीड़ित वंदना और उनके बेटे के दोनों मोबाइल नंबर धोखाधड़ी से JIO में पोर्ट कराए गए थे और ये नंबर नितिन कुमार गुप्ता के नाम पर जारी किए गए थे। पुलिस ने पैसों के लेन-देन की जांच की, तो पता चला कि ठगी की रकम नितिन के कोटक महिंद्रा बैंक अकाउंट और सचिन कुमार गुप्ता की पत्नी प्रिया गुप्ता के NSDL पेमेंट बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की गई थी। तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) के आधार पर पुलिस ने बुराड़ी में छापेमारी की और सचिन और नितिन दोनों भाइयों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, दोनों भाइयों ने तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल कर मोबाइल नंबर पोर्ट कराकर OTP के जरिए बैंकिंग ऐप्स में पहुँच बनाई और बड़ी रकम निकाल ली।
