पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बाद देश भर में एलपीजी की कथित कमी के बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोमवार को कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाई गई आपदा है.
केंद्र में भाजपा की सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के साथ समझौता किया जा रहा है और इसकी वजह से देश के लोगों को कीमत चुकानी पड़ रही है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन खेड़ा ने कहा, “नरेंद्र मोदी को वेस्ट एशिया में युद्ध शुरू होने की बुराई करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. यहां तक कि (ईरान के सुप्रीम लीडर) अयातुल्ला खामेनेई की हत्या पर भी नरेंद्र मोदी के मुंह से शोक का एक शब्द नहीं निकला.”
प्रधानमंत्री पर समझौता करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “अगर नरेंद्र मोदी झुकने के बजाय सीधे खड़े होते, तो इसकी निंदा करते, दुख भी जताते. वे एक सभ्य देश की सम्मानजनक विदेश नीति का सम्मान करते. लेकिन नरेंद्र मोदी की कायरता ने पूरे देश को संकट में डाल दिया है. वह रास्ता (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) जहां से 85 प्रतिशत गैस आती थी, उसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया है.”
प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए उन्होंने आगे कहा, “नरेंद्र मोदी को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने देश के हितों से समझौता क्यों किया. होर्मुज जलडमरूमध्य रूसी-चीनी जहाजों के लिए बिना किसी रुकावट के खुला रहा, लेकिन यह भारत के लिए खुला नहीं रहा.”
उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया, “हम ईरान से ज़्यादा झुकने के लिए नहीं कह रहे हैं. हमने उनसे सिर्फ नियमों पर आधारित व्यवस्था का पालन करने को कहा है, सभी जिम्मेदार, समझदार देश यही करते हैं. भारत ने हमेशा यही किया है. आपने ऐसा क्यों नहीं किया? किस दबाव में?”
एलपीजी संकट की रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए खेड़ा ने कहा, “यह मोदी की बनाई हुई मुसीबत है. हम इस हालत में नहीं पहुंचते, जहां इस संकट की वजह से 10.35 लाख स्कूलों के 11 करोड़ बच्चों को पीएम पोषण स्कीम के तहत मिड-डे मील नहीं मिलेगा.”
“अगर हमने इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए इस गैर-कानूनी युद्ध की आलोचना की होती और उसकी निंदा की होती, अगर हमने इस बात पर जोर दिया होता कि दुनिया नियमों पर आधारित व्यवस्था पर चले, तो यह स्थिति नहीं पहुंचती.” कांग्रेस नेता ने कहा, “अगर अब हम ब्रिक्स के चेयरमैन के तौर पर ज़िम्मेदारी से काम करें. लेकिन, पीएम मोदी में सीधे खड़े होने की हिम्मत नहीं है, वे कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं.”
खेड़ा ने कहा कि अगर सरकार ने जिम्मेदार देशों की तरह काम किया होता, तो भारत पश्चिम एशिया में इस युद्ध से खुद को बचा सकता था. कांग्रेस नेता ने कहा, “हमने नरेंद्र मोदी को बार-बार उनके ‘राजधर्म’ की याद दिलाई, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया. लोग आज इसकी कीमत चुका रहे हैं.”
