दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने राजधानी के 1794 गैर-सहायता प्राप्त (प्राइवेट) स्कूलों के वित्तीय खातों और लेनदेन की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है। सरकार ने यह कदम स्कूलों द्वारा अधिक फीस वसूली और वित्तीय अनियमितताओं की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उठाया है। अधिकारियों के मुताबिक, इन स्कूलों के पिछले 3 साल के वित्तीय खातों की जांच की जाएगी। यह ऑडिट दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम एवं नियम, 1973 (DSEA&R, 1973) के प्रावधानों के तहत कराया जाएगा।
सरकार का कहना है कि जांच के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूल नियमों के अनुसार ही फीस ले रहे हैं या नहीं और कहीं अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क तो नहीं वसूला जा रहा। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक, इन स्कूलों के पिछले तीन साल के वित्तीय खातों की जांच की जाएगी। यह जांच दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम एवं नियम, 1973 (DSEA&R, 1973) के प्रावधानों के तहत कराई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, शिक्षा विभाग को पिछले कुछ समय से प्राइवेट स्कूलों में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कई शिकायतें मिल रही थीं। हालांकि इन शिकायतों की जांच रिपोर्ट में पर्याप्त तथ्य सामने नहीं आ पाए। सरकार ने कुछ मामलों की जांच कराने के बाद पाया कि मौजूदा जांच प्रक्रिया सभी अनियमितताओं को उजागर करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूलों के खातों का ऑडिट कराने के लिए तीन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाने का फैसला किया है। प्रत्येक यूनिट में 10-10 चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) शामिल होंगे, जो स्कूलों के पिछले तीन वर्षों के वित्तीय लेन-देन का विस्तृत विश्लेषण करेंगे। यह पूरा विश्लेषण शिक्षा निदेशक की निगरानी में किया जाएगा। 3 प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) करेंगी ऑडिट, कुल 30 चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) होंगे शामिल, इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 6.3 करोड़ रुपये का खर्च आएगा

