दिल्ली का लुटियन जोन इन दिनों चर्चा में है। चर्चा इसके रखरखाव पर होने वाले खर्च को लेकर है। वह एक अलग मामला है, लेकिन हकीकत यह है कि लुटियन जोन एक तरह का नशा है, जो एक बार रह लिया उसके लिए यहां से बाहर जाना कठिन हो जाता है। इस लिहाज से बाबा साहेब आंबडेकर शायद एकमात्र नेता रहे, जिन्होंने मंत्री पद छोड़ने के अगले ही दिन लुटियन दिल्ली का अपना सरकारी बंगला छोड़ दिया था। बाबा साहेब ने 27 सितंबर,1951 को नेहरू जी की कैबिनेट से अप्रत्याक्षित रूप से त्यागपत्र दे दिया। दोनों में हिन्दू कोड बिल पर गहरे मतभेद उभर आए थे, उन्होंने अपने समर्थकों से सोच-विचार करने के बाद अगले ही दिन 26 अलीपुर रोड (अब सिविल लाइंस) शिफ्ट कर लिया। फिर वे अपने जीवन के अंत तक उसी बंगले में रहे।
Trending
- Qaumi Patrika Hindi, 01 October 2026
- आज जुटेगा इंडिया गठबंधन, चुनाव आयोग विवाद पर साझा अभियान और संसद में प्रस्ताव पर चर्चा
- Uttarakhand Election से पहले BJP को बड़ा झटकाः जुबिन नौटियाल के पिता ने इस्तीफा, वर्षों से नाराजगी के बीच लिया फैसला
- चुनाव आयोग ने किया बड़ा फैसला : वोटर बनने के लिए अब सिर्फ भरना होगा फॉर्म-6, हटाई गई SIR वाली अतिरिक्त घोषणा
- बडगाम में सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया लश्कर का टॉप कमांडर मोहम्मद आसिफ, कई हमलों में था वांछित
- यूपी के चार हिस्सों में बंटवारे की चर्चा फिर तेज, 2027 से पहले सियासी दावों ने बढ़ाई हलचल
- Qaumi Patrika Hindi, 28 Sep 2026
- Qaumi Patrika Hindi, 27 Sep 2026

