दिल्ली का लुटियन जोन इन दिनों चर्चा में है। चर्चा इसके रखरखाव पर होने वाले खर्च को लेकर है। वह एक अलग मामला है, लेकिन हकीकत यह है कि लुटियन जोन एक तरह का नशा है, जो एक बार रह लिया उसके लिए यहां से बाहर जाना कठिन हो जाता है। इस लिहाज से बाबा साहेब आंबडेकर शायद एकमात्र नेता रहे, जिन्होंने मंत्री पद छोड़ने के अगले ही दिन लुटियन दिल्ली का अपना सरकारी बंगला छोड़ दिया था। बाबा साहेब ने 27 सितंबर,1951 को नेहरू जी की कैबिनेट से अप्रत्याक्षित रूप से त्यागपत्र दे दिया। दोनों में हिन्दू कोड बिल पर गहरे मतभेद उभर आए थे, उन्होंने अपने समर्थकों से सोच-विचार करने के बाद अगले ही दिन 26 अलीपुर रोड (अब सिविल लाइंस) शिफ्ट कर लिया। फिर वे अपने जीवन के अंत तक उसी बंगले में रहे।
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