नेशनल डेस्क: नींद के आगोश ऐसे डुबे लोगों ने शायद कभी सोचा ही नहीं होगा कि बाहर हो रही बारिश उन पर कहर बरतपाने वाली है। कभी नहीं सोचा होगी की वे सुबह का सूरज कभी देख ही नहीं सकेंगे। मौत उन्हें लेने के लिए आ रही है। केरल के वायनाड जिले में हाल ही में एक भीषण प्राकृतिक आपदा ने चार गांवों को तबाह कर दिया। बारिश और भूस्खलन के चलते मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में तबाही मच गई। सुबह होते-होते मूसलधार बारिश और भूस्खलन के कारण इन गांवों की सड़कें और घर पूरी तरह से जलमग्न हो गए। इस हादसे में अब तक 165 शवों की पहचान हो चुकी है और 200 से ज्यादा लोग लापता हैं। राहत शिविरों में 3000 से अधिक लोग आश्रय लिए हुए हैं।
मंजर देख, नहीं रुके आंसू
सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश नीलांबुर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने आपदा के बाद का मंजर देखा, तो उनकी आंखों से आंसू नहीं रुक पाए। वे और उनकी टीम राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। भूस्खलन के बाद मुंडक्कई और चालियार नदियों ने अपना रास्ता बदल लिया, जिससे ये गांव पूरी तरह से डूब गए। चूरलमाला और पोथुकल्लू के बीच के घने जंगलों से बहकर आ रहे पानी ने कई लोगों को अपने साथ बहा लिया। उन्होंने बताया कि सुबह होते-होते मिट्टी और पानी सब बर्बाद कर चुके थे। जहां कभी घर-गलियां थे, गाड़ियां पार्क थी, वहां सिवाय पानी और मिट्टी के कुछ नजर नहीं आया। कहीं बच्चों, महिलाओं की लाशें थीं, तो कहीं किसी का धड़, किसी का सिर था। कहीं पेड़ से लटके लोग थे, जो हाथ जोड़ मदद के लिए गिड़गिड़ा रहे थे।
थोड़ी देर में ही वहां और शव भी मिले…
इसके अलावा नीलांबुर क्षेत्र में भूस्खलन के कारण केवल शव ही मिले। चालियार नदी वायनाड से होकर मलप्पुरम जाती है, जहां पानी का बहाव काफी तेज था। इसी कारण मलप्पुरम में भी बचाव कार्य की आवश्यकता पड़ी। बचाव दल ने कुनिप्पला इलाके में झाड़ियों में एक 3 साल के बच्चे के शव को पाया, और थोड़ी देर में ही वहां और शव भी मिले। नदी के 2 किलोमीटर के दायरे में ही 50 शव पाए गए, जिनमें से कुछ के शरीर के हिस्से गायब थे। लाशों के बीच एक शख्स मदद के लिए बिलख रहा था।

