ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की शिक्षा की तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में बदली है, लेकिन यह बदलाव अभी उस मुकाम तक नहीं पहुंचा है, जहां हर किशोरी के लिए 12वीं के बाद की पढ़ाई स्वाभाविक रूप से उसका अगला कदम बन सके। सरकार की विभिन्न योजनाओं के कारण प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं तक पहुंचती लड़कियों की संख्या बढ़ी ज़रूर है, लेकिन 12वीं के बाद तस्वीर उत्साहजनक नहीं लगती।
इसके कई कारण भी हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटियां गांव से दूर होते हैं। आने-जाने का खर्च बढ़ता है। परिवार को लड़की की सुरक्षा की चिंता रहती है। घर के काम और छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उसके हिस्से आती है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में यह सवाल भी उठता है कि पढ़ाई के बाद नौकरी की क्या गारंटी है? यही वह मोड़ है, जहां उच्च शिक्षा तक पहुंचने वाली एक लड़की के सामने सबसे बड़ी दीवार दिखाई देती है।

