देश के बड़े समाजवादी नेता डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि सड़कें अगर खामोश रहेंगी, तो संसद आवारा हो जाएगी। उनका मतलब ये था कि किसी भी लोकतंत्र को जगाए रखने के लिए जनता को खुद जागते रहना होगा। देश की जनता देख रही है कि कैसे उनके प्रतिनिधि चर्चा से ज्यादा शोर-शराबे और हंगामे में रुचि ले रहे हैं। हर मिनट संसद चलाने में खर्च हो रहा है। आम आदमी के मुद्दे और आवाज संसद से गायब है। संसद में पक्ष-विपक्ष के बीच नूराकुश्ती जारी है।
उम्मीद थी कि संसद का मानसून सत्र हंगामाखेज होगा, क्योंकि पेपर लीक के अलावा, राम मंदिर में चंदा-चढ़ावा चोरी, ई-20 एथेनॉल विवाद, परिसीमन बिल, दल-बदल सरीखे मुद्दे जन-सरोकार, लोकतांत्रिक शुचिता और आम आदमी की आस्था से जुड़े थे। यह भी अपेक्षा की जा रही थी कि जन-सरोकार के इन मुद्दों पर संसद में सार्थक, संरचनात्मक चर्चा होगी, लेकिन पेपर लीक से जुड़े बिल पर ही हमारे सांसदों की विरोधाभासी राजनीति बेनकाब हो

