ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी एम्स से करीब छह-सात किलोमीटर दूर राजधानी के पृथ्वीराज रोड का शोर अचानक गायब हो जाता है, जब आप यॉर्क कब्रिस्तान में घुसते हैं। गेट के ठीक बाहर एक छोटी कब्र नजर आती है। इसकी हालत देखकर लगता है कि इस पर सालों से कोई फूल नहीं चढ़ाया गया होगा, वहां सोई हुई हैं राजकुमारी अमृत कौर। वो महात्मा गांधी की करीबी सहयोगी, स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री और एम्स की फाउंडर थीं।
अमृत कौर कपूरथला राजघराने से थीं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड से शिक्षा ली और आजादी के बाद नेहरू कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री बनीं। शुरुआत में एम्स कोलकाता में खोलने का प्रस्ताव था, लेकिन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री डॉ. बीसी रॉय को यह ठीक नहीं लगा। नतीजा यह हुआ कि कोलकाता का नुकसान और दिल्ली का फायदा हो गया। इसकी 1952 में आधारशिला रखी गई। 18 फरवरी 1956 को अमृत कौर ने लोकसभा में विधेयक पेश किया। दो जून 1956 को एआईआईएमएस अधिनियम पास हुआ और संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का स्वायत्त दर्जा मिला। वे स्वयं एम्स की पहली अध्यक्ष रहीं और अपनी मृत्यु (1964) तक शासन-व्यवस्था को मजबूत करती रहीं।

