नई दिल्ली: दिल्ली की जीवनदायिनी रही और कभी ‘साहिबी’ नदी के नाम से विख्यात नजफगढ़ नाला आज अपने अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा है. सरकारी सर्वे (Bathymetric Survey) सर्वे में खुलासा हुआ है कि इस 57 किलोमीटर लंबे नाले के तल में करीब 91 लाख घन मीटर गाद जमा हो चुकी है. यह गाद न केवल नाले के बहाव को रोक रही है, बल्कि आगामी मानसून में राजधानी के बड़े हिस्से के लिए जलभराव और बाढ़ का गंभीर संकट भी पैदा कर रही है.
सर्वे में खुली व्यवस्था की पोल
दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा कराए गए इस हाई-टेक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक नाले की गहराई अब सिल्ट और कचरे के कारण नाममात्र की रह गई है. दिल्ली और गुरुग्राम के करीब 150 छोटे-बड़े उप-नाले इसमें गिरते हैं, जो अपने साथ भारी मात्रा में औद्योगिक कचरा और सीवेज लेकर आते हैं. आंकड़ों के अनुसार, यमुना में गिरने वाले कुल प्रदूषण का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी नाले से जाता है.

सीएम के साथ जल मंत्री प्रवेश वर्मा
सफाई के लिए ‘मिशन साहिबी’ का आगाज
जलभराव से मिलेगी राहत
नजफगढ़ नाले के चोक होने का सीधा असर द्वारका, नजफगढ़, मटियाला और पश्चिमी दिल्ली के कई इलाकों पर पड़ता है. मामूली बारिश में भी इन क्षेत्रों के जलमग्न होने का मुख्य कारण नाले का ओवरफ्लो होना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस 91 लाख घन मीटर गाद को सफलतापूर्वक हटा लिया जाता है, तो न केवल जलभराव की समस्या हल होगी, बल्कि यमुना की सेहत में भी सुधार दिखेगा.
राहगीरों के लिए बनेगा नया कॉरिडोर
सफाई के साथ-साथ नाले के कायाकल्प की भी योजना है. नाले के किनारों पर बनाई जाने वाली सड़क न केवल कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए अलग ट्रैक भी विकसित किए जाएंगे. इससे नजफगढ़ से बाहरी दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी.
दिल्ली सरकार ने विशेषज्ञों की सुझाव पर दिल्ली में नजफगढ़ नाले में तब्दील हुई साहिबी नदी को फिर से जिंदा करने की बात कही है. क्योंकि विशेषज्ञों के मुताबिक यमुना को दूषित करने में 70 फीसद योगदान नजफगढ़ नाले का है. नजफगढ़ ड्रेन में फ्लोटिंग वेटलैंड और फ्लोटिंग एयरेटर लगाकर पानी को साफ किया जाएगा. साथ ही ड्रेन की सफाई और दोनों तरफ की सड़कों के सौंदर्यीकरण का काम भी शुरू हुआ है. इसके बाद इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर साहिबी नदी को वापस उसके स्वरूप में लाया जाएगा.
