51 वर्षीय पिता ने दावा किया है कि बाल कल्याण समिति (CWC) के आदेश के बाद उनकी बेटी पिछले तीन साल से उनके साथ रह रही थी। पिता का कहना है कि POCSO कोर्ट और CWC के मौजूदा आदेशों के बावजूद, पिछले सप्ताह एक फैमिली कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी उसकी मां को सौंप दी। उनका आरोप है कि इस आदेश को लागू करते समय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और बच्ची को जबरन ले जाया गया। उन्होंने अपनी बेटी की मौजूदा लोकेशन और उसकी सेहत को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इस मामले में दिल्ली पुलिस के नॉर्थ-वेस्ट जिले के DCP भीष्म सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है।
मेरा फोन छीनकर बेटी को जबरन ले गए , उनके मुताबिक, “दोपहर करीब 2:30 बजे जब मैं अपनी बेटी के साथ एक मार्केट में था, तभी करीब 10 लोग वहां पहुंचे। इनमें से कुछ सादे कपड़ों में थे। उन्होंने मुझ पर हमला किया। ताकि मैं किसी से मदद न मांग सकूं, मेरा फोन छीन लिया गया और मुझे जबरदस्ती एक कार में डाल दिया गया।” पिता का दावा है कि यह कार्रवाई कानून के खिलाफ है और कस्टडी से जुड़े मामले में अदालत के आदेशों की अनदेखी की गई। यह मामला पहले से चल रहे पारिवारिक विवाद से जुड़ा है, जिसमें हाल ही में फैमिली कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी उसकी मां को देने का आदेश दिया था।
बच्ची को ले जाने के बाद चिल्ड्रन्स होम भेज दिया
उनका दावा है, “वे बच्ची को जबरदस्ती CWC-वेस्ट ऑफिस ले गए, जहां उसे करीब एक घंटे तक एक बंद कमरे में रखा गया। इसके बाद, बच्ची की मर्जी नहीं होने के बावजूद उसे एक चिल्ड्रन्स होम भेज दिया गया और इस बारे में मुझे कोई भी जानकारी नहीं दी गई।” यह मामला पहले से चल रहे कस्टडी विवाद से जुड़ा है, जिसमें हाल ही में फैमिली कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी उसकी मां को सौंपने का आदेश दिया था। पिता का कहना है कि पूर्व में CWC और POCSO कोर्ट के आदेशों के तहत बच्ची उनके साथ रह रही थी।
अब तक सिर्फ आश्वासन मिला, नहीं मिली कोई मदद
पिता ने आरोप लगाया है कि कथित जबरन कार्रवाई के बाद उन्होंने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली। उन्होंने कहा, “मैंने पुलिस हेल्पलाइन 112 पर कॉल कर पुलिस की ज़्यादती की शिकायत दर्ज कराई। मुझे भरोसा दिया गया कि मामले पर गौर किया जाएगा। इसके अलावा मैंने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर भी संपर्क किया, लेकिन अभी तक कहीं से कोई मदद नहीं मिली।”

