वर्तमान समय में डायबिटीज (मधुमेह) विश्वभर में तेजी से बढ़ने वाली जीवनशैली संबंधी बीमारियों में से एक है। भारत को “डायबिटीज की राजधानी” भी कहा जाने लगा है, क्योंकि यहां मधुमेह रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अनियमित दिनचर्या, असंतुलित भोजन, मानसिक तनाव, शारीरिक श्रम की कमी, मोटापा तथा आनुवंशिक कारण इसके प्रमुख कारण हैं।
आयुर्वेद में मधुमेह को “प्रमेह” रोग के अंतर्गत वर्णित किया गया है। चरक, सुश्रुत तथा वाग्भट जैसे महान आयुर्वेदाचार्यों ने प्रमेह के कारण, लक्षण, उपचार और आहार-विहार का विस्तृत वर्णन किया है। आयुर्वेद के अनुसार केवल दवाओं से ही नहीं, बल्कि उचित आहार, नियमित दिनचर्या, योग, प्राणायाम तथा मानसिक संतुलन के माध्यम से भी मधुमेह को नियंत्रित रखा जा सकता है। आयुर्वेद का सिद्धांत है-“आहार ही सर्वोत्तम औषधि है।”

