पांच दिन से गंगा जल की कमी से जूझ रही हरकी पैड़ी पर रविवार को फिर श्रद्धालुओं की चहल-पहल दिखाई दी। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से पानी की व्यवस्था किए जाने के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। घाटों पर जल पहुंचने से स्नान, दान और पूजा-पाठ की गतिविधियां भी दोबारा शुरू हो गईं। श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से तीर्थ पुरोहितों और फल-फूल व प्रसाद बेचने वाले दुकानदारों ने भी राहत की सांस ली।
दरअसल, हर साल दशहरे के अवसर पर गंगनहर की वार्षिक बंदी की जाती है। यह बंदी दिवाली तक चलती है। इस दौरान नहर की सफाई और मरम्मत के लिए पानी की आपूर्ति रोक दी जाती है। इसका असर हरकी पैड़ी सहित आसपास के घाटों पर भी पड़ता है। इस बार गंगा जल का प्रवाह लगभग बंद होने से हरकी पैड़ी पर पानी का स्तर काफी कम हो गया था। हालात ऐसे हो गए थे कि श्रद्धालुओं को आचमन के लिए भी पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा था। हरिद्वार पहुंचने वाले कई श्रद्धालुओं को दूसरे घाटों पर स्नान करना पड़ रहा था।

