प्रदेश में विधानमंडल सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही को निर्बाध और प्रभावी बनाए रखने के उद्देश्य से सभी प्रशासनिक समितियों की बैठकों पर रोक रहेगी। संसदीय कार्य विभाग की ओर से जारी शासनादेश के अनुपालन के लिए मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।प्रमुख सचिव जेपी सिंह-II की ओर से जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि संसद या राज्य विधानमंडल के सत्र के दौरान मंडल, जिला अथवा अन्य स्तरों पर गठित ऐसी किसी भी समिति की बैठक आयोजित नहीं की जाएगी, जिनमें सांसद या विधायक सदस्य अथवा नामित सदस्य हों। शासनादेश में वर्ष 1998 में जारी पूर्व आदेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है, ताकि विधायकों की विधायी जिम्मेदारियों में किसी प्रकार का व्यवधान न आए और वे सत्र की कार्यवाही में पूरी तरह सहभागी रह सकें। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही इस व्यवस्था से अपवाद संभव होगा और वह भी तब, जब लोकसभा, राज्यसभा अथवा राज्य विधानमंडल का सत्र लगातार तीन दिनों के लिए स्थगित हो।
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