- Qaumi Patrika Hindi, 01 October 2026
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- Qaumi Patrika Hindi, 28 Sep 2026
- Qaumi Patrika Hindi, 27 Sep 2026
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भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रदेश प्रभारियों और सह प्रभारियों की नई…
नरेश मल्होत्रा ! नई दिल्ली, 21 सितंबर: वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं समाजसेवी गुरचरन सिंह बब्बर ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को तीसरी अत्यावश्यक शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें विदेशी नंबरों से लगातार जान से मारने की धमकी भरी कॉल आ रही हैं और नवंबर 1984 के सिख-विरोधी कत्लेआम के बारे में चुप रहने की चेतावनी दी जा रही है। ऑल इंडिया सिख कॉन्फ्रेंस (बब्बर) के अध्यक्ष बब्बर ने गंभीर आशंका व्यक्त की है कि लॉरेंस बिश्नोई आपराधिक नेटवर्क से जुड़े लोग अथवा उसके नाम का दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति इन धमकी भरी कॉलों के पीछे हो सकते हैं। 21 सितंबर की उनकी शिकायत के अनुसार, कॉल करने वालों ने कथित रूप से धमकी दी कि यदि उन्होंने नवंबर 1984 के कत्लेआम के संबंध में सवाल उठाना बंद नहीं किया तो उन्हें “सिद्धू मूसेवाला की तरह समाप्त कर दिया जाएगा।” बब्बर ने दिल्ली पुलिस से तत्काल यह पता लगाने का आग्रह किया है कि कॉल करने वाले वास्तविक गिरोह के सदस्य हैं, फर्जी व्यक्ति हैं, किराये पर रखे गए बिचौलिए हैं अथवा किसी अन्य संगठित आपराधिक नेटवर्क के सदस्य हैं। बब्बर ने कहा, “यह मेरी तीसरी लिखित और स्पष्ट शिकायत है। मेरी जान पर तत्काल और लगातार खतरा बना हुआ है।” उन्होंने बताया कि उन्होंने 20 सितंबर को पुलिस आयुक्त कार्यालय को दोबारा ईमेल भेजा था, लेकिन अभी तक उन्हें प्रभावी सुरक्षा अथवा की गई कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी जान को कथित रूप से लगातार धमकियां मिलने के बावजूद वह इस समय बिना किसी सुरक्षा घेरे और बिना किसी हथियार के आवागमन कर रहे हैं। बब्बर नवंबर 1984 में सिखों की हत्याओं और पीड़ितों के शवों को कथित रूप से दिल्ली से हटाए जाने की जांच के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि निर्दोष सिख पीड़ितों के शवों को ट्रकों में भरकर दिल्ली के आसपास के जंगलों और अरावली की पहाड़ियों में ले जाकर जला दिया गया था। अपनी नवीनतम शिकायत में बब्बर ने जांचकर्ताओं से यह पता लगाने का भी अनुरोध किया है कि क्या किसी संगठित गिरोह, राजनीतिक आपराधिक तत्व, किराये पर रखे गए बिचौलिए, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी अथवा किसी अन्य व्यक्ति ने कथित धमकियों की साजिश रची, आर्थिक सहायता दी, उन्हें सुगम बनाया अथवा प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के लिए कथित रूप से काम करने वाले अथवा उससे संबंध होने का दावा करने वाले आपराधिक तत्वों और नवंबर 1984 की घटनाओं से जुड़े दिल्ली पुलिस के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों की संभावित संलिप्तता पर भी संदेह व्यक्त किया है। हालांकि, बब्बर ने स्पष्ट रूप से कहा कि ये उनकी गंभीर आशंकाएं और जांच की संभावित दिशाएं हैं, जिनका स्वतंत्र रूप से पुलिस सत्यापन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत को बिना किसी प्रमाण के किसी व्यक्ति को दोषी मान लेने के अनुरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बब्बर ने दावा किया कि उनके पास नवंबर 1984 के कत्लेआम तथा पीड़ितों के शवों के कथित प्रबंधन और उन्हें नष्ट करने से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजी सामग्री मौजूद है। उन्होंने कहा कि वह समाचार पत्रों, सार्वजनिक प्रतिवेदनों और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार जवाबदेही की मांग करते रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनके अभियान को पंजाब, पूरे भारत और कई देशों में रहने वाले सिखों का समर्थन मिल रहा है तथा जांच या मुकदमे से भयभीत लोग उन्हें डराकर उनकी आवाज बंद कराने का प्रयास कर सकते हैं। अपनी शिकायत में बब्बर ने दिल्ली पुलिस से उनका प्रतिवेदन तत्काल दर्ज करके उसकी लिखित पावती देने तथा उन्हें डीडी या डायरी नंबर, शिकायत नंबर और मामले के लिए नियुक्त अधिकारी का नाम एवं संपर्क विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि जहां शिकायत में बताए गए तथ्य संज्ञेय अपराधों का खुलासा करते हैं, वहां एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की तत्काल जांच स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच अथवा किसी अन्य विशेष जांच इकाई को सौंपी जाए। बब्बर ने जांचकर्ताओं से अंतरराष्ट्रीय कॉलों का पता लगाने और कॉल डिटेल रिकॉर्ड, ग्राहक की जानकारी, वीओआईपी रूटिंग रिकॉर्ड, आईपी लॉग, डिवाइस पहचान विवरण तथा प्लेटफॉर्म डेटा सहित सभी उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग की है। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग लेने का भी अनुरोध किया है।…
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