भारतीय रुपया मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चार पैसे कमजोर होकर 95.74 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। घरेलू मुद्रा पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और आयातकों की ओर से डॉलर की बढ़ती मांग का दबाव रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, सरकारी बैंकों के जरिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लगातार हस्तक्षेप ने रुपये की गिरावट को सीमित रखने में मदद की। एशियाई शेयर बाजारों में कमजोरी और ईरान से जुड़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने के बावजूद रुपया सीमित दायरे में कारोबार करता रहा।

