राज्यसभा में मंगलवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के ऊपर काम का जबरदस्त दबाव और उन्हें कम मानदेय दिये जाने का मुद्दा उठाते हुए सरकार से अनुरोध किया कि देश भर में इनकी रिक्तियों को भरा जाए और इनके मानदेय में केंद्र द्वारा दिये जाने वाले अंशदान को दोगुना किया जाए।गांधी ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में लगीं आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायक तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम करने वाले कार्यकर्ता काम के बोझ के अत्यंत दबाव में हैं।उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में की गई थीं, किंतु सार्वजनिक सेवा में बहुत योगदान देने के बावजूद इन महिला कार्यकर्ताओं पर अत्यंत दबाव है और उन्हें कम पारिश्रमिक दिया जाता है। गांधी ने कहा कि देश भर में आशा कार्यकर्ता टीकाकरण कार्यक्रम चलाती हैं तथा मातृ कल्याण एवं परिवार कल्याण कार्यों में मदद करती हैं, इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय और सामाजिक सुरक्षा मिलती है।
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