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- Qaumi Patrika Hindi, 27 October 2026
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एशियन गेम्स 2026 में 23 सितंबर का दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए बेहद अहम रहने वाला है। भारत के कई खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में पदक की दावेदारी पेश करेंगे। खासतौर पर वेटलिफ्टिंग, शूटिंग और बैडमिंटन पर भारतीय खेल प्रशंसकों की नजर रहेगी। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग के फाइनल में उतरेंगी। वहीं, पेरिस ओलंपिक 2024 में दो व्यक्तिगत कांस्य पदक जीत चुकीं मनु भाकर महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भारत की चुनौती पेश करेंगी। इसके अलावा पुरुष बैडमिंटन टीम सेमीफाइनल में चीन के खिलाफ उतरेगी।
एशियाई खेलों में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने अपने खिताब के बचाव की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ा दिया है। ग्रुप-ए के मुकाबले में भारत ने ईरान को 37-23 से शिकस्त देकर शानदार जीत दर्ज की। टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में खेले गए मुकाबले में शुरुआत में पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने जोरदार वापसी की और मैच पर पूरी तरह पकड़ बना ली। 8-4 से पिछड़ा भारत, पूजा ने बदला मैच का रुख ईरान ने मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की और शुरुआती दौर में 8-4 की बढ़त बना ली। इससे भारतीय डिफेंस पर दबाव बढ़ गया…
प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे शक्तिशाली अल नीनो को लेकर जलवायु वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। एक नए आकलन के मुताबिक, अगले छह महीनों में इस घटना से जुड़ी अतिरिक्त गर्मी के कारण दुनियाभर में 4.51 लाख से अधिक लोगों की मौत हो सकती है। यह अनुमान जलवायु परिवर्तन के चलते पहले से बढ़ रही गर्मी से होने वाली मौतों के अतिरिक्त है। शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, अल नीनो का प्रभाव इंडोनेशिया, भारत और नाइजीरिया से लेकर अमेरिका तक महसूस किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि…
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में आयोजित सेमाफोर के ‘द नेक्स्ट 3 बिलियन’ सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों, वैश्विक संस्थानों और कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का केंद्र प्रौद्योगिकी और डिजिटल समावेशन के जरिए आर्थिक अवसरों का विस्तार रहा। सम्मेलन में केन्या के राष्ट्रपति विलियम सामोई रुटो, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की प्रधानमंत्री जूडिथ सुमिनवा, विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक डॉ. न्गोजी ओकोंजो-इवेला और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) ने विज्ञापन संख्या-05/2025 के तहत आयोजित पुलिस अवर निरीक्षक भर्ती की मुख्य लिखित परीक्षा रद्द कर दी है। आयोग ने बुधवार को जारी आधिकारिक सूचना में बताया कि 27 मई 2026 को दो पालियों में आयोजित की गई मुख्य लिखित परीक्षा को अपरिहार्य कारणों से रद्द किया जाता है। परीक्षा की नई तारीख की घोषणा बाद में अलग से की जाएगी। आयोग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि परीक्षा से जुड़ी आगे की जानकारी के लिए केवल बीपीएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं पर भरोसा करें। आयोग ने स्पष्ट किया है कि…
भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रदेश प्रभारियों और सह प्रभारियों की नई नियुक्तियों का ऐलान किया। पार्टी ने यह संगठनात्मक फेरबदल आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए किया है। नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को दी गई है। उनके साथ जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह प्रभारी बनाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक यूपी में पांच सदस्यीय टीम को जिम्मेदारी दी गई है। उत्तराखंड में राम माधव को प्रभारी बनाया गया है। अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज सह प्रभारी की…
नरेश मल्होत्रा ! नई दिल्ली, 21 सितंबर: वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं समाजसेवी गुरचरन सिंह बब्बर ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को तीसरी अत्यावश्यक शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें विदेशी नंबरों से लगातार जान से मारने की धमकी भरी कॉल आ रही हैं और नवंबर 1984 के सिख-विरोधी कत्लेआम के बारे में चुप रहने की चेतावनी दी जा रही है। ऑल इंडिया सिख कॉन्फ्रेंस (बब्बर) के अध्यक्ष बब्बर ने गंभीर आशंका व्यक्त की है कि लॉरेंस बिश्नोई आपराधिक नेटवर्क से जुड़े लोग अथवा उसके नाम का दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति इन धमकी भरी कॉलों के पीछे हो सकते हैं। 21 सितंबर की उनकी शिकायत के अनुसार, कॉल करने वालों ने कथित रूप से धमकी दी कि यदि उन्होंने नवंबर 1984 के कत्लेआम के संबंध में सवाल उठाना बंद नहीं किया तो उन्हें “सिद्धू मूसेवाला की तरह समाप्त कर दिया जाएगा।” बब्बर ने दिल्ली पुलिस से तत्काल यह पता लगाने का आग्रह किया है कि कॉल करने वाले वास्तविक गिरोह के सदस्य हैं, फर्जी व्यक्ति हैं, किराये पर रखे गए बिचौलिए हैं अथवा किसी अन्य संगठित आपराधिक नेटवर्क के सदस्य हैं। बब्बर ने कहा, “यह मेरी तीसरी लिखित और स्पष्ट शिकायत है। मेरी जान पर तत्काल और लगातार खतरा बना हुआ है।” उन्होंने बताया कि उन्होंने 20 सितंबर को पुलिस आयुक्त कार्यालय को दोबारा ईमेल भेजा था, लेकिन अभी तक उन्हें प्रभावी सुरक्षा अथवा की गई कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी जान को कथित रूप से लगातार धमकियां मिलने के बावजूद वह इस समय बिना किसी सुरक्षा घेरे और बिना किसी हथियार के आवागमन कर रहे हैं। बब्बर नवंबर 1984 में सिखों की हत्याओं और पीड़ितों के शवों को कथित रूप से दिल्ली से हटाए जाने की जांच के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि निर्दोष सिख पीड़ितों के शवों को ट्रकों में भरकर दिल्ली के आसपास के जंगलों और अरावली की पहाड़ियों में ले जाकर जला दिया गया था। अपनी नवीनतम शिकायत में बब्बर ने जांचकर्ताओं से यह पता लगाने का भी अनुरोध किया है कि क्या किसी संगठित गिरोह, राजनीतिक आपराधिक तत्व, किराये पर रखे गए बिचौलिए, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी अथवा किसी अन्य व्यक्ति ने कथित धमकियों की साजिश रची, आर्थिक सहायता दी, उन्हें सुगम बनाया अथवा प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के लिए कथित रूप से काम करने वाले अथवा उससे संबंध होने का दावा करने वाले आपराधिक तत्वों और नवंबर 1984 की घटनाओं से जुड़े दिल्ली पुलिस के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों की संभावित संलिप्तता पर भी संदेह व्यक्त किया है। हालांकि, बब्बर ने स्पष्ट रूप से कहा कि ये उनकी गंभीर आशंकाएं और जांच की संभावित दिशाएं हैं, जिनका स्वतंत्र रूप से पुलिस सत्यापन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत को बिना किसी प्रमाण के किसी व्यक्ति को दोषी मान लेने के अनुरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बब्बर ने दावा किया कि उनके पास नवंबर 1984 के कत्लेआम तथा पीड़ितों के शवों के कथित प्रबंधन और उन्हें नष्ट करने से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजी सामग्री मौजूद है। उन्होंने कहा कि वह समाचार पत्रों, सार्वजनिक प्रतिवेदनों और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार जवाबदेही की मांग करते रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनके अभियान को पंजाब, पूरे भारत और कई देशों में रहने वाले सिखों का समर्थन मिल रहा है तथा जांच या मुकदमे से भयभीत लोग उन्हें डराकर उनकी आवाज बंद कराने का प्रयास कर सकते हैं। अपनी शिकायत में बब्बर ने दिल्ली पुलिस से उनका प्रतिवेदन तत्काल दर्ज करके उसकी लिखित पावती देने तथा उन्हें डीडी या डायरी नंबर, शिकायत नंबर और मामले के लिए नियुक्त अधिकारी का नाम एवं संपर्क विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि जहां शिकायत में बताए गए तथ्य संज्ञेय अपराधों का खुलासा करते हैं, वहां एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की तत्काल जांच स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच अथवा किसी अन्य विशेष जांच इकाई को सौंपी जाए। बब्बर ने जांचकर्ताओं से अंतरराष्ट्रीय कॉलों का पता लगाने और कॉल डिटेल रिकॉर्ड, ग्राहक की जानकारी, वीओआईपी रूटिंग रिकॉर्ड, आईपी लॉग, डिवाइस पहचान विवरण तथा प्लेटफॉर्म डेटा सहित सभी उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग की है। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग लेने का भी अनुरोध किया है। लगातार बने हुए खतरे का उल्लेख करते हुए बब्बर ने अपने और अपने परिवार के लिए तत्काल अंतरिम सशस्त्र पुलिस सुरक्षा की मांग की है, जिसमें एक सशस्त्र निजी सुरक्षा अधिकारी तथा उनके निवास और कार्यस्थल की सुरक्षा समीक्षा शामिल हो। उन्होंने वरिष्ठ स्तर पर खतरे का आकलन कराने की भी मांग की है, जिसमें उनके सार्वजनिक अभियान, कॉल करने वालों द्वारा प्रयोग की गई भाषा, इस्तेमाल किए गए विदेशी नंबरों, जिन आपराधिक नेटवर्कों के नाम कथित रूप से लिए गए और पहले हुई किसी भी संदिग्ध गतिविधि अथवा निगरानी को शामिल किया जाए। बब्बर ने अधिकारियों से शस्त्र अधिनियम और शस्त्र नियमों के अंतर्गत आत्मरक्षा के लिए वैध आग्नेयास्त्र लाइसेंस के उनके अनुरोध पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके आवेदन पर अंतिम निर्णय होने तक प्रभावी सरकारी सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। बब्बर ने कहा, “मैं एक वरिष्ठ नागरिक, पत्रकार, लेखक और समाजसेवी हूं। मैं केवल कानूनी सुरक्षा मांग रहा हूं, ताकि मैं बिना किसी भय के जीवित रह सकूं और अपना कार्य जारी रख सकूं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें अथवा उनके परिवार के किसी सदस्य को कोई नुकसान पहुंचता है, तो सरकारी रिकॉर्ड में यह स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि सक्षम अधिकारियों को इस स्पष्ट और लगातार बने हुए खतरे के संबंध में बार-बार लिखित चेतावनी दी गई थी। शिकायत की प्रतियां भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों, संसद सदस्यों, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग तथा प्रमुख सिख धार्मिक संस्थाओं और नेताओं को भेजी गई हैं। कॉल करने वालों की पहचान और शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बब्बर ने तथ्यों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम पुलिस जांच की मांग की है।
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