हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायालय ने कहा है कि यदि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर उपलब्ध ही नहीं हो पा रहे हैं, तो वेंटिलेटरों की संख्या के संबंध में प्रस्तुत आंकड़ों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि चिकित्सा सुविधाओं के लिए कुल बजट का कितना हिस्सा आवंटित किया गया है और अस्पतालों में सुविधाओं की स्थिति क्या है। मामले की अगली सुनवायी 25 मई को होगी।
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