नई दिल्ली। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू जब अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाती हैं तो अतीत की अपनी कामयाबियों से भविष्य में नयी ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा लेती हैं । 29 वर्ष की सिंधू ने लगभग हर ट्रॉफी और पदक जीता है। वह दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाले चार भारतीय खिलाड़ियों (सुशील कुमार, नीरज चोपड़ा और मनु भाकर) में से है। वह विश्व चैम्पियन रही हैं और एशियाई खेलों तथा राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीते हैं। पिछले सत्र में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता को दोहरा नहीं सकी। पेरिस ओलंपिक में पदक नहीं जीत पाने से उनके भविष्य को लेकर अटकलें लगने लगी। सिंधु हालांकि अटकलों से विचलित नहीं होती। वह उसी जुनून और जज्बे के साथ कोर्ट पर उतरती है जिससे उसने विश्व बैडमिंटन की ऊंचाइयों को छुआ है।
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