फुटबाल को ‘खेलों का राजा’ यूं ही नहीं कहा जाता। यह एक खेल ही नहीं, वरन वैश्विक जुनून, उत्साह का तूफान व भावनाओं का जीवंत उत्सव भी है। फुटबाल मात्र 90 मिनट का पावर गेम ही नहीं, बल्कि रणनीति, मानसिक दृढ़ता व जज्बे का युद्ध भी है। एक गोल की खुशी, हार का दर्द और किसी अंडरडॉग टीम का मैदान पर उतरने वाले 11 खिलाड़ी योद्धा होते हैं, जहां प्रत्येक सेकंड का निर्णय, पास और टैकल हार या जीत की दिशा तय करते हैं। करीब डेढ़ घंटे तक लगातार दौड़ते रहना, कभी-कभी स्प्रिंट लगाना व शारीरिक टक्कर झेलना फुटबालरों की सहनशक्ति की परीक्षा लेता है। यह कहना प्रासंगिक कि विश्व कप का प्रत्येक मैचन ‘करो या मरो’ की जंग जैसा ही होता है।
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