कोविड-19 महामारी के दौर ने दुनिया भर की कार्यसंस्कृति को पूरी तरह बदल दिया था। उस संकट काल में व्यवसायों को चालू रखने और नौकरियों को बचाने के लिए शुरू हुआ ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) का चलन आज करोड़ों कामकाजी लोगों की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। दफ्तर आने-जाने के तनाव से मुक्ति, समय की बचत और काम में (फ्लेक्सिबिलिटी जैसी खूबियों के कारण आज भी एक बड़ा वर्ग घर से काम करने को प्राथमिकता देता है। यहाँ तक कि लोग इस सुविधा के बदले अपनी तनख्वाह में 4 से 10 फीसदी तक की कटौती सहने को भी तैयार हैं।लेकिन, क्या घर की चारदीवारी से काम करना वाकई हर लिहाज से फायदेमंद है? ‘जर्नल साइंस’ में प्रकाशित न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक की अर्थशास्त्री नतालिया इमैनुएल और उनकी टीम की एक हालिया रिसर्च ने इस सिक्के के दूसरे और बेहद चिंताजनक पहलू को उजागर किया है।
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