- Qaumi Patrika Hindi, 03 October 2026
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- Qaumi Patrika Hindi, 2 Oct 2026
- Qaumi Patrika Hindi, 01 October 2026
Author: admin
नरेश मल्होत्रा ! नई दिल्ली, 21 सितंबर: वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं समाजसेवी गुरचरन सिंह बब्बर ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को तीसरी अत्यावश्यक शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें विदेशी नंबरों से लगातार जान से मारने की धमकी भरी कॉल आ रही हैं और नवंबर 1984 के सिख-विरोधी कत्लेआम के बारे में चुप रहने की चेतावनी दी जा रही है। ऑल इंडिया सिख कॉन्फ्रेंस (बब्बर) के अध्यक्ष बब्बर ने गंभीर आशंका व्यक्त की है कि लॉरेंस बिश्नोई आपराधिक नेटवर्क से जुड़े लोग अथवा उसके नाम का दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति इन धमकी भरी कॉलों के पीछे हो सकते हैं। 21 सितंबर की उनकी शिकायत के अनुसार, कॉल करने वालों ने कथित रूप से धमकी दी कि यदि उन्होंने नवंबर 1984 के कत्लेआम के संबंध में सवाल उठाना बंद नहीं किया तो उन्हें “सिद्धू मूसेवाला की तरह समाप्त कर दिया जाएगा।” बब्बर ने दिल्ली पुलिस से तत्काल यह पता लगाने का आग्रह किया है कि कॉल करने वाले वास्तविक गिरोह के सदस्य हैं, फर्जी व्यक्ति हैं, किराये पर रखे गए बिचौलिए हैं अथवा किसी अन्य संगठित आपराधिक नेटवर्क के सदस्य हैं। बब्बर ने कहा, “यह मेरी तीसरी लिखित और स्पष्ट शिकायत है। मेरी जान पर तत्काल और लगातार खतरा बना हुआ है।” उन्होंने बताया कि उन्होंने 20 सितंबर को पुलिस आयुक्त कार्यालय को दोबारा ईमेल भेजा था, लेकिन अभी तक उन्हें प्रभावी सुरक्षा अथवा की गई कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी जान को कथित रूप से लगातार धमकियां मिलने के बावजूद वह इस समय बिना किसी सुरक्षा घेरे और बिना किसी हथियार के आवागमन कर रहे हैं। बब्बर नवंबर 1984 में सिखों की हत्याओं और पीड़ितों के शवों को कथित रूप से दिल्ली से हटाए जाने की जांच के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि निर्दोष सिख पीड़ितों के शवों को ट्रकों में भरकर दिल्ली के आसपास के जंगलों और अरावली की पहाड़ियों में ले जाकर जला दिया गया था। अपनी नवीनतम शिकायत में बब्बर ने जांचकर्ताओं से यह पता लगाने का भी अनुरोध किया है कि क्या किसी संगठित गिरोह, राजनीतिक आपराधिक तत्व, किराये पर रखे गए बिचौलिए, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी अथवा किसी अन्य व्यक्ति ने कथित धमकियों की साजिश रची, आर्थिक सहायता दी, उन्हें सुगम बनाया अथवा प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के लिए कथित रूप से काम करने वाले अथवा उससे संबंध होने का दावा करने वाले आपराधिक तत्वों और नवंबर 1984 की घटनाओं से जुड़े दिल्ली पुलिस के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों की संभावित संलिप्तता पर भी संदेह व्यक्त किया है। हालांकि, बब्बर ने स्पष्ट रूप से कहा कि ये उनकी गंभीर आशंकाएं और जांच की संभावित दिशाएं हैं, जिनका स्वतंत्र रूप से पुलिस सत्यापन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत को बिना किसी प्रमाण के किसी व्यक्ति को दोषी मान लेने के अनुरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बब्बर ने दावा किया कि उनके पास नवंबर 1984 के कत्लेआम तथा पीड़ितों के शवों के कथित प्रबंधन और उन्हें नष्ट करने से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजी सामग्री मौजूद है। उन्होंने कहा कि वह समाचार पत्रों, सार्वजनिक प्रतिवेदनों और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार जवाबदेही की मांग करते रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनके अभियान को पंजाब, पूरे भारत और कई देशों में रहने वाले सिखों का समर्थन मिल रहा है तथा जांच या मुकदमे से भयभीत लोग उन्हें डराकर उनकी आवाज बंद कराने का प्रयास कर सकते हैं। अपनी शिकायत में बब्बर ने दिल्ली पुलिस से उनका प्रतिवेदन तत्काल दर्ज करके उसकी लिखित पावती देने तथा उन्हें डीडी या डायरी नंबर, शिकायत नंबर और मामले के लिए नियुक्त अधिकारी का नाम एवं संपर्क विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि जहां शिकायत में बताए गए तथ्य संज्ञेय अपराधों का खुलासा करते हैं, वहां एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की तत्काल जांच स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच अथवा किसी अन्य विशेष जांच इकाई को सौंपी जाए। बब्बर ने जांचकर्ताओं से अंतरराष्ट्रीय कॉलों का पता लगाने और कॉल डिटेल रिकॉर्ड, ग्राहक की जानकारी, वीओआईपी रूटिंग रिकॉर्ड, आईपी लॉग, डिवाइस पहचान विवरण तथा प्लेटफॉर्म डेटा सहित सभी उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग की है। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग लेने का भी अनुरोध किया है। लगातार बने हुए खतरे का उल्लेख करते हुए बब्बर ने अपने और अपने परिवार के लिए तत्काल अंतरिम सशस्त्र पुलिस सुरक्षा की मांग की है, जिसमें एक सशस्त्र निजी सुरक्षा अधिकारी तथा उनके निवास और कार्यस्थल की सुरक्षा समीक्षा शामिल हो। उन्होंने वरिष्ठ स्तर पर खतरे का आकलन कराने की भी मांग की है, जिसमें उनके सार्वजनिक अभियान, कॉल करने वालों द्वारा प्रयोग की गई भाषा, इस्तेमाल किए गए विदेशी नंबरों, जिन आपराधिक नेटवर्कों के नाम कथित रूप से लिए गए और पहले हुई किसी भी संदिग्ध गतिविधि अथवा निगरानी को शामिल किया जाए। बब्बर ने अधिकारियों से शस्त्र अधिनियम और शस्त्र नियमों के अंतर्गत आत्मरक्षा के लिए वैध आग्नेयास्त्र लाइसेंस के उनके अनुरोध पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके आवेदन पर अंतिम निर्णय होने तक प्रभावी सरकारी सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। बब्बर ने कहा, “मैं एक वरिष्ठ नागरिक, पत्रकार, लेखक और समाजसेवी हूं। मैं केवल कानूनी सुरक्षा मांग रहा हूं, ताकि मैं बिना किसी भय के जीवित रह सकूं और अपना कार्य जारी रख सकूं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें अथवा उनके परिवार के किसी सदस्य को कोई नुकसान पहुंचता है, तो सरकारी रिकॉर्ड में यह स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि सक्षम अधिकारियों को इस स्पष्ट और लगातार बने हुए खतरे के संबंध में बार-बार लिखित चेतावनी दी गई थी। शिकायत की प्रतियां भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों, संसद सदस्यों, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग तथा प्रमुख सिख धार्मिक संस्थाओं और नेताओं को भेजी गई हैं। कॉल करने वालों की पहचान और शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बब्बर ने तथ्यों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम पुलिस जांच की मांग की है।
रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की तैयारी से भारत पर भी दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए मंगलवार को 214-211 के अंतर से प्रक्रियात्मक मंजूरी दे दी। अब विधेयक पर अंतिम मतदान होना है। इस विधेयक का आधिकारिक नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। सीनेट इसे पहले ही 86-11 के भारी बहुमत से पारित कर चुका है। प्रस्तावित कानून अमेरिकी…
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित रियल एस्टेट धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के तहत गुरुवार को हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा के गुरुग्राम स्थित आवास एवं फार्महाउस पर छापेमारी की। ईडी के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह छापेमारी रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड के खिलाफ दर्ज मामले से जुड़ी है। ईडी ने बताया कि कंपनी पर आरोप है कि समय पर कब्जा देने, सुनिश्चित लाभ, पट्टा किराया और बिक्री विलेख (सेल डीड) कराने का भरोसा देकर निवेशकों को वाणिज्यिक परियोजनाओं में निवेश के लिए आकर्षित किया गया। ईडी के एक अधिकारी…
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में दो फाड़ के बीच चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को बड़ा आदेश जारी किया है। आयोग ने दोनों गुटों को अंतरिम व्यवस्था के तहत अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। इससे पहले 17 सितंबर को आयोग ने पार्टी के नाम और मौजूदा चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था। आयोग के नए आदेश के मुताबिक अरूप रॉय/ऋतब्रत बनर्जी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इस गुट को चुनाव चिह्न के तौर पर ‘लिफाफा’ (Envelope) आवंटित किया गया है। वहीं, ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया…
उत्तर प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा को विस्तार देने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। शासन ने सुल्तानपुर, अमेठी समेत 14 जिलों में नए राजकीय नर्सिंग कॉलेज खोलने को मंजूरी दी है। इन कॉलेजों का संचालन संबंधित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में किया जाएगा। प्रत्येक कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की 60 सीटें होंगी। इस तरह सरकारी क्षेत्र में कुल 840 नई बीएससी नर्सिंग सीटें बढ़ेंगी।नए राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2027-28 से बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। प्रदेश सरकार ने नर्सिंग शिक्षा के विस्तार के लिए हर जिले में नर्सिंग कॉलेज उपलब्ध कराने…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को 76 वर्ष के हो गए हैं, पीएम के तौर पर उनके 12 वर्षों के नेतृत्व में देश ने आर्थिक स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इसमें जनधन खातों के जरिए बैंकिंग सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना, स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाना देना, रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार और तेज जीडीपी ग्रोथ शामिल हैं। पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में शुरू की गई जनधन योजना से बड़ी संख्या में कमजोर वर्ग को बैंकिग सेवाओं से जोड़ने में मदद मिली है। इस योजना के तहत 2 सितंबर, 2026 तक 59.21 करोड़ बैंकिंग खाते खोले जा चुके हैं।…
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