नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाले उन पर्यावरणीय मुद्दों को हल तलाशने की कोशिश की, जिनमें से कुछ ने राष्ट्रीय राजधानी में लोगों को 2024 में बढ़ते प्रदूषण के स्तर और घटती वायु गुणवत्ता के बीच सांस लेने के लिए मजबूर कर दिया। हरित निकाय के समक्ष अन्य मुद्दे जल निकायों में प्रदूषण और ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन से संबंधित थे। बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए एजेंसियों ने विभिन्न रिपोर्टें दाखिल कीं, लेकिन सच्चाई यह है कि सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्लीवासियों की सांस फूल गई। दिसंबर में, स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करने वाले प्राथमिक प्रदूषक पीएम 2.5 का खतरनाक स्तर दर्ज किया गया। 35 निगरानी स्टेशनों में से 32 ने वायु गुणवत्ता को गंभीर-प्लस श्रेणी में दर्ज किया और कुछ क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 470 दर्ज किया गया।
Trending
- गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब की संगत को बड़ी राहत मिली है, लखीशाह बंजारा हॉल के पास नए बाथरूम बनकर तैयार हैं।
- केंद्र सरकार का बड़ा फैसला : दिव्यांगजन पेंशन के बदले नियम, अब 40% दिव्यांगता पर मिलेगी पात्रता, NSAP का नाम भी बदला
- Jio IPO: 30,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में रिलायंस, प्राइस बैंड तय; कर्मचारियों को हर शेयर पर छूट
- शारदीय नवरात्र का पांचवां दिन आज, जानें मां स्कंदमाता की महिमा, उनका स्वरूप पूजा का महत्व और तारकासुर वध की कथा
- PM Modi In Ladakh: लद्दाख को 3,350 करोड़ की सौगात, पीएम मोदी बोले – युवाओं की बेहतर शिक्षा पर हमारा फोकस
- प्रयागराज में CM योगी का राहुल गांधी पर तंज, बोले- आजादी के लिए सिर्फ नेहरू नहीं, मसुरियादीन पासी भी गए थे जेल
- Qaumi Patrika Hindi, 15 October 2026
- अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का 21 अक्टूबर से होगा आगाज, 24 देशों के कलाकारों की भागीदारी की उम्मीद

