कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है और ”कॉम्प्रोमाइज्ड” (समझौता कर चुके) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्यापार समझौते की तरह इस मामले में भी अमेरिका के सामने समर्पण कर दिया है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह दावा भी किया कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई लेनदेन की संख्या भले ही करीब पांच प्रतिशत हो, लेकिन यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है तथा उसका बोझ अंततः कीमतों में बढ़ोतरी के जरिये ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने इसको लेकर ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ” सरकार का कहना है कि ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।” उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं और अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
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